बुधवार, 11 नवंबर 2009

अपना

अपना


चाहे तुम कितना झुठलालो ,
अपना तो बस अपना है।


कुछ भी कर लो ख़ुशी मना लो ,
पर अपनों की याद छूटे,
अपनों से कितना भी रूठो ,
अपनों के साथ ही रुचे।


अपने देश की बात क्या कहना,
पास अगर तो मोल समझें,
दूर हुए तो मन भर आये ,
उसकी मिट्टी को भी तरसें




- कुसुम ठाकुर -

6 टिप्पणियाँ:

MANOJ KUMAR 11 नवंबर 2009 को 8:44 am  

aoane to apane hote hain...

Udan Tashtari 11 नवंबर 2009 को 8:46 am  

चाहे तुम कितना झुठलालो,
अपना तो बस अपना है।

-सत्य वचन!!

राजीव तनेजा 11 नवंबर 2009 को 10:10 am  

एक-एक पंक्ति अपने में सत्य को समेटे हुए...


बहुत बढिया

अजय कुमार 11 नवंबर 2009 को 11:14 am  

कुछ भी कर लो ख़ुशी मना लो ,

पर अपनों की याद न छूटे,

सौ टका सही बात

Nirmla Kapila 11 नवंबर 2009 को 2:32 pm  

चाहे तुम कितना झुठलालो,
अपना तो बस अपना है
सही कहा कुसुम जी सुन्दर अभिवयक्ति शुभकामनायें

ओम आर्य 11 नवंबर 2009 को 4:32 pm  

बिल्कुल सही कहा है आपने ......और सुन्दर बात है अपने तो सिर्फ अपने ही होते है !