सोमवार, 14 दिसंबर 2009

ब्लागबाबा को नहीं जानते? तो क्या जानते हो.?..

भारत में बाबाओं, उपदेशकों और संतों की संख्या में तेजी से ईजाफा हुआ है, हाल ये है शहर से एक बाबाजी के कूच करते ही, दूसरे बाबा का प्रवचन शुरू हो जाता है. मुझे ये देखकर भारी अचरज हुआ कि सारे प्रवचन हाउसफुल होते हैं. एक तरफ धर्म के प्रति आस्था तेजी से बढ़ती दिखती है, साथ ही लोग प्रवचनों में पिले पड़े हैं, तो दूसरी ओर पाप, अन्याय, अत्याचार और वो तमाम चीजें जो बुराई के दायरे में आती है, दुगनी रफ्तार से बढ़ रही हैं.
छत्तीसगढ़ में कोई बाबा लोकल नहीं है, यहां जो भी आ रहे हैं सब इम्पोर्टेड हैं, या शायद बाबागिरी का काम लोकल स्तर पर उतना सफल नहीं होता. हम हिन्दुस्तानियों का  इम्पोर्टेड का पागलपन आज का नहीं है, ये हमारी गुलामी के दौर के शुरुआत से ही हम से चिपक चुका है, तो भला बाबा हमें लोकल कब से रास आने लगे.
आप भी सोच रहे होंगे मै यह क्या अजीब टापिक ले बैठा, दरअसल आज शाम नुक्कड़ पर पान की दुकान के पास दो लोगों की बातचीत सुनते सुनते मैं अपने आप को उस बातचीत में शामिल होने से रोक नहीं पाया और टापिक था बाबाओं की शहर में लगातार उपस्थिति.
मै ये जानकर भारी अचरज में पड़ गया कि उन लोगों के पास तमाम बाबाओं की एकदम अप्-टू-डेट जानकारी थी, मुझे लगा मेरे पास भी एक बाबा  की जानकारी है जो शायद  अभी इन तक नहीं पहुंची होगी. मैने भी पुड़िया छोड़ी...
मैं अच्छा आप लोग अपने छत्तीसगढ़ के एक बहुत फेमस बाबा को तो जानते ही होगे.
आदमी 1 क्या कहा आपने? छत्तीसगढ़ के और फेमस..! नहीं तो.
आदमी 2 देखिये भाई साहब दूर-दूर तक ऐसा कोई बाबा नहीं जिसे हम ना जानते हों. और आप है की किसी लोकल साधू को बाबा बनाये दे रहे हैं.
मैं देखिये ये जिन बाबाजी की मैं बात कर रहा हुं, ये कोई सामान्य बाबा नहीं है, आप
    लोगों के बाबागण तो आपके सामने सशरीर उपस्थित होते होगें, है ना..
आदमी 1 भाई साहब आप तो मजाक...
मैं  अरे नहीं-नहीं अपने ये बाबाजी कभी सामने उपस्थित नहीं होते...
आदमी 2 तो फिर कहां मिलते हैं?
मैं   देखो भैय्या लोग आप लोग तो अपने छत्तीसगढ़ को पिछड़ा समझते हैं, लेकिन  देश  का पहला हाई-टेक बाबा देने का श्रेय अपने छत्तीसगढ़ को ही जाता है.
आदमी 2 अच्छा..! मगर ये बाबाजी छत्तीसगढ़ के हैं किस शहर से और मिलने का ये
          हाई-टेक तरीका क्या है?
आदमी 1 ( आदमी 2 से) कमाल की बात है यार दुनिया भर के बाबा की जानकारी    
         लोग हम से लेते हैं, और लोकल लेवल के ईतने सोलिड बाबा के बारे में..
आदमी 2 हां यार, अच्छा भाई साहब ये हाई-टेक बाबागिरी क्या होती है? अब जैसे
         हमें इनसे मिलना हो तो? और ये किस नाम से जाने जाते हैं?
मैं देखिये भाई साहब ये बाबाजी सिर्फ इंटरनेट पर मिलते है और वो भी तब जब
     उनकी मर्जी हो... उनका रहना छत्तीसगढ़ के किस हिस्से में होता है ये तो पता
    नहीं... मगर ये उन्हीं ने बातों-बातों मे बताया था कि वो छत्तीसगढ़ से है और
    छत्तीसगढी में बातें करने में उन्हें बड़ा रस आता है. अब रही बात उनके नाम की तो 
    उनका बाबागिरी वाला नाम तो स्वामी ललितानंद है मगर इंटरनेट की दुनिया में वो
    ब्लागबाबा के नाम से दुनिया भर में जाने जाते हैं.
आदमी 2 दुनिया भर में..?
मैं हां-हां दुनिया भर में, अब आप लोग गर्व से कह सकते हो, अपने छत्तीसगढ़ के पास
     अपनी तरह का अनोखा अशरीरी, इंटरनेशनल, सिर्फ इंटरनेट पर दिखने वाला   
    अदभुत बाबा है, ब्लागबाबा.
आदमी 1 हां यार ये तो कमाल का बाबा है, इस बाबा के बारे में सबको बताना पड़ेगा.
आदमी 2 भैय्या इनकी कोई तस्वीर वगैरह है क्या आपके पास... दर्शन हो जाते...
मैं अभी लो भैय्या, मैं तो इनको.. मेरा मतलब है इनकी तस्वीर हमेशा जेब में लिये फिरता हुं, ये देखो...
आदमी 1 वाह भैय्या क्या तेज है चेहरे पर...
आद्मी 2 मगर भैय्या इनके चेहरे से तो उम्र ज्यादा नहीं दिखती, और बाले पूरे सफेद.... कहीं नकली तो...
मैं -  क्या बोलते हो..! इस उम्र में भी चेहरे पर  जवानो जैसी चमक बने रहने के पीछे कारण है.
आदमी 1 कौन सा कारण?
मैं इनके पास एक जादूई द्रव है, रोज लेते रहने पर जवानों जैसी चमक बनी रहती है.
आदमी 1 तब तो इनसे मुलाकात जरूरी हो गयी है भैय्या. अपने को भी चमक बनाये रखना है यार..
मैं –  पहुंची हुई चीज है भाई लोगों, ऐसे बाबाजी आपको ढूंढे नहीं मिलने वाले.
आदमी 2 भाई साहब एक बात तो आपने बताई ही नहीं.
मैं  वो क्या?
आदमी 2 ये अपने छत्तीसगढ़ के ब्लागबाबा ललितानंद जी कुछ चमत्कार वगैरह भी करते हैं या इंटरनेट पर सिर्फ प्रवचन करते है?
मैं भाई लोग इनके चमत्कार सुनोगे तो बाकी जितने बाबा लोगों को जानते हो पानी भरते नजर आयेंगे, इनके चमत्कारों का बयान इनके ब्लाग पर जाने वाले और इनके शिष्य ही बता पायेंगे और फिर सारी जानकारी क्या एक ही बार में ले लोगे. शेष अगली
मुलाकात में....
आदमी 1 मगर आपसे अगली मुलाकात्..
मैं कल फिर इसी समय इसी पान की दुकान पर आ जाना.      

15 टिप्पणियाँ:

महफूज़ अली 15 दिसंबर 2009 को 12:48 am  

हम तो श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के चेले हैं..... उन्ही के प्रवचन.... सुनते हैं..... और सुनाते हैं...... और अब मार्केटिंग डिपार्टमेंट संभालने जा रहे हैं...... घूम घूम कर हम श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी के फालोवर बना रहे हैं.......

श्री श्री १००८ बाबा समीरानन्द जी कि जय.....

आप भी आईये आश्रम में .......स्वागत है.......

suryakant gupta 15 दिसंबर 2009 को 1:10 am  

सर्वप्रथम महामंडलेश्वर श्री श्री १००००००००००००००००००००००००००८ श्री स्वामी ललितानंद को हमारा प्रणाम स्वीकार हो. इनके बारे में लिखा लेख पढ़ा. सही लिखा है अइयर जी ने. इनकी प्रशंसा की बात तो ठीक है. पर आज बाबाओं की भरमार के बारे में जो लिखा है अच्छा लगा. केवल बाबाओं ही नही प्रवचनकर्ताओं की जो बात है वह अच्छी लगी. सार सारे प्रवचन का एक है. "काम क्रोध मद लोभ सब, नाथ नरक के पंथ. सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहि जेहि संत". भीड़ तो आज हर प्रवचनकरता जुटा रहा है.
एक चीज है मुझे भी मन में जरूर लगता है कि इसकी सार्थकता कितनी है. प्रवचन चलते तक बैठे सुनते रहे. बाद में उठे अपना पिछवाडा झडाये. फिर चले उसी ढर्रे पर. किसी प्रवचनकरता की आलोचना करने से नहीं है यहाँ अभिप्राय. पर आज इनकी बहुतायतता को देखते हुए लिखना पड़ताहै.

Udan Tashtari 15 दिसंबर 2009 को 4:58 am  

श्री स्वामी ललितानंद जी को प्रणाम. यह तो आश्रम के मुख्य प्रबंधक हैं. इनका गुणगान सुन मन प्रसन्न हुआ.

Ratan Singh Shekhawat 15 दिसंबर 2009 को 6:33 am  

हम तो पहले से ही इन बाबा जी के शिष्य है जी ! प्रणाम बाबा ललितानंद जी को !

ललित शर्मा 15 दिसंबर 2009 को 8:19 am  

अय्यर भैया!ज्ञान वर्धक चर्चा रही पान दुकान पे, छत्तिसगढ़ के बाबा को प्रणाम्।

अविनाश वाचस्पति 15 दिसंबर 2009 को 8:36 am  

बाबा की आभा में होता रहे इजाफा

हिमांशु । Himanshu 15 दिसंबर 2009 को 9:01 am  

जय हो बाबा ललितानंद !

निर्मला कपिला 15 दिसंबर 2009 को 12:13 pm  

बाबा जी हम तो पहले ही बाबाओं के खिलाफ अभियान चलाये हुये हैं एक और बाबा का आगमन हो गया? अब क्या कहें। मगर एक बात है इनका आश्रम नेट पर है ये कम से कम लोगों की जमीन तो नहीं हडपेंगे इस लिये जय बाबा समीरानन्द जी कह देते हैं ।

परमजीत बाली 15 दिसंबर 2009 को 12:20 pm  

जय हो बाबाओ की।;)

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" 15 दिसंबर 2009 को 2:14 pm  

ये बाबा जी तो सचमुच बहुत पहुँचे हुए लगते हैं :)
वैसे अभी कहाँ तक पहुँचे हैं ?

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ 15 दिसंबर 2009 को 3:00 pm  

हूँ, ये बाबा लोग यहाँ भी आ पहुंच।
------------------
छोटी सी गल्ती, जो बड़े-बड़े ब्लॉगर करते हैं।
धरती का हर बाशिंदा महफ़ूज़ रहे, खुशहाल रहे।

स्वच्छ संदेश: हिन्दोस्तान की आवाज़ 15 दिसंबर 2009 को 4:03 pm  

पान की दूकान पर मैं पांचवां ग्राहक था वो भी नाम के साथ... यकीन नहीं तो समर्थक में मेरा फोटो देख लेना

Rekhaa Prahalad 15 दिसंबर 2009 को 6:29 pm  

जय हो बाबाओ की aur unki list badhti hi jai.................................. ......................................

बी एस पाबला 15 दिसंबर 2009 को 8:34 pm  

बाबा जी से कहिएगा, अपना आशीर्वाद बनाए रखें

बी एस पाबला

राजीव तनेजा 19 दिसंबर 2009 को 12:23 am  

बोल बाबा ललितानंद महाराज की...जय