गुरुवार, 17 दिसंबर 2009

दुकान पान के शौकीनों को मेरा नमस्ते.....

पान की दूकान पर चर्चा करने अब भाई मै भी आ गया हूँ भाई ललित जी ने जोर डाला की आप भी पान की दुकान पर आये और चर्चा करें यहाँ बड़ी मदमस्त चर्चा होती है ....सो मै भी पान की दुकान पर बतियाने आ गया हूँ.

पान के शौकीनों भाई समीर लाल, भाई अनिल पुसदकर, भाई राजकुमार ग्वालानी, भाई गिरीश पंकज, भाई बी.एस. पावला, भाई संजीव तिवारी, भाई राजीव तनेजा और भाई बालकृष्ण अय्यर, ललित शर्मा को मेरा अग्रिम नमस्कार पहुंचे.

हाँ मै एक बात और कहें देत हूँ की मै नागपुरी मीठी पान पत्ती का शौकीन हूँ और उसमे थोडा सा रिमझिम और नारियल कतरी और थोड़ी सी तम्बाखू हो तो वाह फिर क्या कहने . बस मीठी पत्ती का स्वाद चखते ही तबियत भी मद मस्त हो जाती है और दिमागी घोड़े भी तेजी से हरकत करने लगते है.

भाई पानवाले आज मेरी और से सभी पान के शौकीनों को पान खिलाओ उसके बाद ही हमारी चर्चा पर ध्यान देना. आज पहली बार आया हूँ सो ज्यादा तो बतिया नहीं सकता परन्तु बाद जो बतियाने का सिलसिला शुरू होगा जो किसी सीरियल ब्लास्ट से कम न होगा.

भैय्या अपने जा बात सुनी है की नववर्ष पर होने वाले कार्यक्रम में विपाशा बासु ने अपने लटके झटके दिखाने के लिए दो करोड़ की मांग कर डाली है और आयोजको ने दो करोड़ देने की पेशकश कर दी है ... बताओ भैय्या नंग पन दिखाने के इतनी बड़ी रकम दी जा सकती है तो आगे क्या होगा ? जा बात समझ से परे है पर मेरा दिल कह रहा है की आगे रकम मिलने नंगे कलाकार भी सामने आने लगेंगे.

इतने में पान वाले ने टोककर कहा भैय्या तनिक हमें भी तो बताओ नंगे होने पर कहाँ पैसे मिलते है. हमारे देश में कई राजनीतिक व्यापारी और कलाकार है उनमे नंगो की कमी नहीं है जहाँ देखो वही नंगे नजर आते है.

उसकी बात सुनकर मुझे जोर की हंसी आ गई और मैंने पान थूककर कहा भाई पान वाले तू अपनी दुकान चला जिसमे सार है.. बतियाने का काम हम लोगो का है .

अच्छा तो हम चलते है फिर मिलेंगे....राम राम राम

4 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 17 दिसंबर 2009 को 7:13 pm  

svagat hai misir ji, kaisa laga pan? ab pan to bheda ghat ka hi khayenge aapke sath.

राजीव तनेजा 19 दिसंबर 2009 को 12:13 am  

आपका स्वागत है पान की दुकान पर

डॉ टी एस दराल 20 दिसंबर 2009 को 8:45 am  

पान मीठा या सादा ही ठीक है।

ताऊ रामपुरिया 20 दिसंबर 2009 को 9:57 am  

अब आयेगा मजा असली पान का.

रामराम.