रविवार, 3 जनवरी 2010

एक नाटक जो लिखा नहीं गया ! "शठ को कोटि प्रणाम्!"

आज पान की दुकान पर  अनिल भाई का ड्यूटी था लेकिन वो नागपुर में चक्का जाम में  फँस गए ,तो क्या  करें? हम पान की दुकान पर बैठ के चुना लगा रहे थे. तभी महेंद्र मिश्रा जी आ गए!
हमने कहा......."पाय लगी मिसिर जी, आज कैसे विलम्ब हो गया? हम तो आपका पान लगा के रख दिये थे"
मिसिर जी बोले.....का बताएं शर्मा जी.......आज हमारे बुलाग मोहल्ले में नए साल पे एक बाबा पधारे हैं.........लंगोटा नन्द महाराज... तो हम उनके आश्रम पे चले गए थे... उन्हां जाके देखे तो .... हमने बाबा जी नया साल का शुभ कामना दिया.... तभी देखा और बुलागर भी आ रहे हैं बाबा जी के पास तब हम तो खिसक लिए............... तभी बिलम्ब हो गया.
हमने कहा......ई तो बढ़िया समाचार बताये मिसिर जी......... जरा हम भी दुकान बढा के ........बाबा लोगन के दरशन-परसन करके आते हैं....! 
तो भैया हम भी दुकान बढ़ाये और पहुँच गये लंगोटा नन्द महा मठ वाणी आश्रम में......... वहां बाबा लंगोटा नन्द महाराज कह रहे थे...................... इसके बाद हम आश्रम से डिरेक्ट सवांद आपको सुना रहे हैं.... आप भी मौज लीजिए......
राज भाटिय़ा .........बाबा जी प्रणाम !! भर पेट खाने के बाद भुख नही लगती ?? कोई जडी बुटी बताये महा राज आप को ओर आप के परिवार को नववर्ष की बहुत बधाई एवं अनेक शुभकामनाएँ! 
लंगोटा नंदजी महाराज ....बच्चा राज भाटिया, कल्याण हो,चिंता न करो,उपाय बता रहे हैं- काली बिल्ली की पूंछ में लाल कपड़ा बाँध कर हमारी भभूत का लेप उसपर चढ़ा दो, हम भभूत जल्द भेजेंगे, तुम्हारा कल्याण होगा,खाना खाने के बाद जबरदस्त भूख लगेगी!
लंगोटा नंदजी महाराज ......सभी ब्लोगर बच्चा, कोई भी समस्या हो, तुरंत निसंकोच संपर्क करो,हमारी भभूत द्वारा हर समस्या का निदान संभव है, हमारे मठ में हिमालय की जड़ी-बूटी द्वारा मंत्रित भभूत चमत्कारी असर करेगी !नक्कालों से सावधान ! नव वर्ष में सभी ब्लागरों का कल्याण हो !
ताऊ रामपुरिया .....बाबाश्री लंगोटानंद जी नववर्ष की शुभकामनाएं. नववर्ष मे आपके चेलों की संख्या मे असीमित वृद्धि हो. यही कामना है
लंगोटा नंदजी महाराज ........बच्चा, रामपुरिया, कल्याण हो! अंग्रेगी नव वर्ष की बधाई हो !बच्चा, हमको पता है तुम्हे टीआरपी की जरूरत नहीं है,तुम्हारा ब्लॉग जगत में बड़ा नाम है, खूब तरक्की करो, हमारे मठ में भी भभूत ग्रहण करने आ जाना, और ऊँचा नाम होगा ! बच्चा हमारे फोलोवर बनकर हमारी शिष्यता स्वीकारो !
अब बाबा लंगोटा नन्द और ताऊ जी का संवाद चल ही रहा था तो हम भी उठा के अपना जुमला ठोक दिये. बाबा जी भी मुंह फार के देखने लगे
ललित शर्मा ......बाबा जी तीन काल का दरस है,सन् 2010 का नया बरस है,नये साल की आपको बधाई,कांबल ओढ के खाओ मलाई,
लंगोटा नंदजी महाराज ......बच्चा रामपुरिया, हम तुमसे अत्यंत प्रसन्न हुए, मांग लो वरदान !ताऊ रामपुरिया ...बाबाजी वरदान ई देणो चाहो हो तो कोई दूध आली पहलूण झौठडी दिलवाण की किरपा करो.:)
लंगोटा नंदजी महाराज ......बच्चा रामपुरिया, कल्याण हो! तुम हमारे प्रिय शिष्यों में से हो, हम तुम्हे चमत्कारी भभूत भिजवाने की व्यवस्था कर रहे हैं तुम हमारी भभूत की ३० पुड़िया बना लेना और स्नान के बाद प्रतिदिन ब्रेकफास्ट के साथ फांक लेना, एक मंत्र भी दे रहे हैं- ॐ लंगोटा नन्द फट स्वाहा ! इस मंत्र का जाप रात को खुली छत पर उलटे लेटकर १० बार करना ! जल्द ही अरब पति हो जाओगे ! खुश रहो !
ताऊ रामपुरिया ....जय हो बाबा श्री लंगोटा नंद महाराज की जय हो.बाबाजी एक बात पूछनी थी कि अगर ॐ लंगोटा नन्द फट स्वाहा ! का जाप रात के साथ साथ दिन मे सीधे लेटकर भी कर लिया जाये तो असर कुछ जल्दी होगा क्या? जय हो सच्चे गुरु लंगोटा नंद महाराज की जय हो।
लंगोटा नंदजी महाराज ...बच्चा ललित शर्मा, कहाँ हो? जल्दी आओ.. बच्चा रामपुरिया को समझाओ कहीं उल्टा आसन न कर बैठे, हमें बड़ी चिंता हो रही है.
ताऊ रामपुरिया .....जय हो बाबा लंगोटानंद जी की, अब समझ गये अब नही करेंगे. और बाबाजी ललित जी तो ढोसी के पहाड पर तपस्या करने चले गये हैं. खुद बाबा ललितानंद बन कर. 
तभी अचानक बाबा शठाधीश जी महाराज का आगमन होता है वो आते ही एक सवाल दागते हैं. सुनिए.
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .....अलख निरंजन, ये किसका धुणा है, कौन बाबाजी बिराजते हैं?हमारा एक चेला बहुत दिन से हमारी लंगोटी लेकर फ़रार हो गया है, तब से हम उसको ढुंढ रहे है। कहीं मिले तो बताना। बिना गुरु के ज्ञान नही। ज्ञान बिना स्थान नही॥ अलख निरंजन
इसके बाद इस कहानी में एक नए पात्र का प्रवेश होता है वो हैं पी.सी.गोदियाल जी,अब आगे देखिये
पी.सी.गोदियाल ........."हम हिमालय से तुम्हारी पीड़ा दूर करने के लिए ही उतरे हैं,...."बाबा जी एकदम झूठ बोल रहे है आप ! हिमालय से इसलिए उतर भागे क्योंकि वहाँ पर ठण्ड से कुल्फी जम रही है !:) मैं भी हाल ही में होकर आया हूँ !
लंगोटा नंदजी महाराज ......बच्चा गोदियाल, कल्याण हो ! हम तो लंगोटधारी हैं,ठण्ड हो या बरसात-गर्मी हम नहीं डरते, क्या मार सकेगी ठण्ड उसे ब्लागरों के लिए जो जीता हो,
पी.सी.गोदियाल ...........बाबा धीरे बोलो, वो शठाधीश बाबा आप ही को ढूंढ रहे है ! पता है आपको जब दो बाबा लड़ते है तो चिमटे से बजाते है एक दुसरे को :)
लंगोटा नंदजी महाराज ......श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज!आप हम पर शक न करें, हम तो एक मात्र लंगोट सहित पैदा हुए हैं , ब्लॉग जगत में बहुत से चालू बाबा घूम रहे हैं , उनकी लंगोट चेक करें! कल्याण हो ! 
लंगोटा नंदजी महाराज .....बच्चा गोदियाल, हम न तो किसी प्रकार का नशा करते हैं और न ही किसी नशेडी चिलम खोर बाबा से डरते हैं, नशे का जो हुआ शिकार,उतर जायेगा पाखण्ड का बुखार ! कल्याण हो !
राज भाटिय़ा .......लंगोटा नंदजी महाराज जी आप की शकल ओर बाते तो हमारे ताऊ राम पुरिया से मिलती है, ताऊ भी बहुत पहुचा हुं गुरु बाबा है बडो बडो को टोपी पहन देता है,अब कोई उपाय बताओ वो मेरे सारे पैसे वापिस कर दे, जब भी मांगो तभी नयी टोपी पहना कर फ़िर से पैसे ऎंठ लेता है गवाह सारा ब्लांग जगत है बाबा आप का टिकाना कही इंदोर मै तो नही है, जय हो बाबा लंगोटा नंदजी महाराज जी की जय हो.
लंगोटा नंदजी महाराज ......बच्चा राज भाटिया, कल्याण हो! पहले हमारे फोलोवर बनकर हमारी शिष्यता ग्रहण करो,तब भभूत पार्सल करेंगे, रामपुरिया पहले से हमारा परम शिष्य है !
पी.सी.गोदियाल ......श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज आप सुन रहे है न ? आपके इन लगोट चोर बाबा ने आप पर कितना गंभीर आरोप मडा है , जल्दी जबाब दीजिये वरना मैं भी बाबा लंगोट के खेमे में चला जाउंगा , वैसे भी आजकल दल्बद्लुओ की ही ज्यादा चलती है !
लंगोटा नंदजी महाराज ......बच्चा गोदियाल, क्यों दो बाबाओं की कुश्ती करने पर तुले हो ? कल्याण हो!
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .......अलख निरंजन! बाबा लंगोटानंद जी, आपको क्या पता लंगोटी चोरी होने का दर्द, हम तो ऐसे ही घुम रहे हैं। ठंड इतनी ज्यादा है कि चिलम पीना ही पड़ता है। नही तो ईंजन ठंडा हो जायेगा।अगर कोई भक्त पैग की भी बेवस्था करवा दे तो रात कट जाती है। ध्यान रहे हम बाबा वामपंथी(अघोरी)है और पंच मकारों को धारण करते हैं, वही मुक्ति का मारग है।
पी.सी.गोदियाल .......मैंने आज से दल बदल लिया, मैं बामपंथियों (सबसे निठल्ले ) के दल में कदापि नहीं रह सकता, इसलिए आज से मैं लंगोतानंद बाबाजी के खेमे में हूँ 
लंगोटा नंदजी महाराज .........बाबा शठाधीश जी, कल्याण हो ! अगर इतनी ही ठण्ड लगती है तो शादी कर लें , साल के ३६५ दिन इंजन गर्म रहेगा !
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .......लंगोटानंद महाराज,आप भी संतों को गलत सलाह दे रहे हैं,गाछी, बाछी और दासी। तीनो संतो की फ़ांसी ॥ ये संतो का काम नही है।
ताऊ रामपुरिया ......बाबाजी आपको मालूम है कि नही बाबा शठाधीश महाराज का लंगोट भी डेढ महिने पहले चोरी हुआ था...जरा आपके प्रज्ञा चक्षुओं का इस्तेमाल करें और बताये...शठाधीश महाराज डेढ महिने से बिना लंगोट घूम रहे हैं.
लंगोटा नंदजी महाराज .......बच्चा रामपुरिया, हमारे पास एक मात्र लंगोट है .. दो होती तो एक श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज को दे देता, उन्हें इस तरह नागा न घूमने देता ! कल्याण हो
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज ........अलख निरंजन, मद्यं,मासं,मीनं,मुद्रं, मैथुनं एव च। ऐते पंच मकार: श्योर्मोक्षदे युगे युगे। यह पंच मकार ही मोक्ष का मार्ग है। इन्हे धारण करने से ही मोक्ष मिलेगा॥ तभी कल्याण होगा
लंगोटा नंदजी महाराज .......श्री बाबा शठाधीश जी महाराज दूसरों को मोक्ष का मार्ग दिखाने से पहले खुद मदिरा-पान से मोक्ष पा लें ! कल्याण हो 
लंगोटा नंदजी महाराज .......श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज! संत तो श्री तुलसी दास, कबीर दास को कहते हैं, ये मदिरा-पान नहीं करते थे,आप तो इन सबसे हटकर हैं, इसलिए आपको सही सलाह दी है, बूरा लगा हो तो खेद है ! कल्याण हो !
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .......मोक्ष का सरल रास्ता और बताते है। पहले तो हमने पंच मकार बताए थे अब सुनो, पीत्वा-पीत्वा पुनर्पित्वा, यावत्पतति भुतले। पुन: उत्त्थाय पुनर्पित्वा, पुनर्जन्म ना विद्यते॥ किसने कहा मदिरा पान बुराई है, जिन्होने छिप के पी,उन्होने ही बात उड़ाई है। अलख निरंजन
सिद्ध बाबा बालकनाथ त्रिकालज्ञ ......ये क्या होरहा है बच्चा लोग? हर हर महादेव...
यहाँ पर लंगोटा नन्द जी महाराज हैरत में पड़ जाते हैं की अभी तक तो हम एक ही बाबा थे अब ये सब नए-नए बाबा कहाँ से निकल-निकल कर आ रहे है. बड़ी सोचनीय स्थिति में फँस जाते हैं और कहते हैं. 
लंगोटा नंदजी महाराज .........सिद्ध बाबा बालकनाथ त्रिकालज्ञ कल्याण हो!आप आये मठ में हमारे, हमें भी हैरत है, कभी हम अपनी लंगोट देखते हैं , कभी आपको ......?
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .......मृत्यु लोक पे मना है धर सोम रस की आस । जब लेकर आयेगी उर्वशी,दौड़ेंगे सब उसके पास॥
लंगोटा नंदजी महाराज ......श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज, कल्याण हो, शायाद आप कहना चाहते हो खुलकर पीने में क्या बुराई है, तो खूब पियो, कलेजा आपका जलेगा,परेशान आपके चेले होंगे.. वैसे आपका नाम तो ढीठा धीश महाराज होना चाहिए था, ये नाम आप पर फिट बैठता है !
श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज .........लंगोटा नंद जी महाराज, हमने पहले ही बताया, हम वाम पंथी हैं। दुनिया के जितने भंगेड़ी, गंजड़ी, शराबी, कबाबी, शठ, मुरख, बेवकुफ़, अज्ञानी, बेध्यानी, लु्च्चे, लफ़ंगे, सब हमारे पट्ट शिष्य हैं।तभी तो हम शठाधीश कहलाते हैं। इस ब्रह्माण्ड मे हम अकेले शठ संत है। इसीलिए जगत शठों की वंदना करता है। हमारे आशीर्वाद और श्राप का तुरंत फ़ल मिलता है।इसलिए कहा गया है,
शठ की संगत कीजिए तज काम और धाम। 
शठ से ही संसार चले शठ को कोटि प्रणाम्!


लंगोटा नंदजी महाराज ........श्री श्री बाबा शठाधीश जी महाराज, कल्याण हो! सत्य वचन है !
इतना कह कर दुनो बाबा लोग अपने-अपने मार्ग पर चल दिये. हम खड़े होकर सोच रहे थे!
दुनो बाबा जी के बीच जो ज्ञान रंजन हुआ  उसको सुनकर हम आनंदित हो उठे, चलो भाई हमारे बुलाग मोहल्ले के बाबा लोग भी ज्ञानी ध्यानी हैं. दू पक्ष हर जगह दिखता है, यहाँ पर भी दू पक्ष दिखाई दे रहा हैं, लेकिन दुनो बाबा कितने संयमी हैं. हमारे को ये देखने मिला और दुनो ने एक उदहारण पेश किया बुलाग जगत के सामने. हमने ये कहानी यूँ ही नहीं लिखी है,आप एक -एक संवाद देखिये. आपको लगेगा यही संसार है.
चलिए एक बार जय बोलिए बाबा शठाधीश जी महाराज की जय . लंगोटा नन्द जी महराज की जय 


ललित शर्मा, 

11 टिप्पणियाँ:

राजीव तनेजा 3 जनवरी 2010 को 1:15 am  

हा...हा...हा..बहुत ही बढिया...मज़ेदार प्रसंग रचित हो गया

मनोज कुमार 3 जनवरी 2010 को 7:52 am  

बहुत अच्छी रचना। बधाई।

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi 3 जनवरी 2010 को 9:19 am  

यह महफिल भी जमी।

Kulwant Happy 3 जनवरी 2010 को 10:21 am  

અભી બાબાઓં કી જય હો

जी.के. अवधिया 3 जनवरी 2010 को 2:20 pm  

ललित जी! आपने तो पान की दुकान खोल लिया है अब हम भी कुछ धंधा करना चाहते हैं। सुना है कि आजकल हिन्दी ब्लोग जगत में टिप्पणियों के लिये बहुत मारा मारी है इसलिये सोच रहे हैं कि एक टिप्पणी दुकान खोल लें। आपकी क्या राय है? मात्र रु.२५.०० में एक टिप्पणी के हिसाब से दुकान चलेगी या नहीं?

बस बाबा लोगों के ब्लोग में भर टिप्पणी नहीं करेंगे क्योंकि ये लोग २५ रुपये देने के बदले भभूत थमा देंगे।

ताऊ रामपुरिया 3 जनवरी 2010 को 3:00 pm  

जय हो बाबा जी की. क्या गजब की पोस्ट बनाई है? आनंद आगया पूरी टिप्पणियों को यहां पोस्ट के रुप मे पढकर.

रामराम

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari 3 जनवरी 2010 को 5:15 pm  

मनोज कुमार जी ने अपनी टिप्पणी मे सार बात पहले ही लिख दी है, हम उसका समर्थन करते है. गुसाई बाबा ने तो पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी जाके नख अरू जटा बिसाला, सोई तापस परसिद्ध कलि‍काला.

महेन्द्र मिश्र 3 जनवरी 2010 को 8:12 pm  

त बढ़िया .... भैय्या आपको मालूम है जे लंगोटा नन्द बाबा का लंगोट कही खो गया है ... अखाबार इ पढ़ा था की बाबा का लंगोट कमानिया गेट के नीचे डरो तो . हा हा हा

महेन्द्र मिश्र 3 जनवरी 2010 को 8:14 pm  

एक बात और कहत हों की आजकल बाबा मैदाने नेट पर जमकर लंगोट घुमाए पड़े है .... और बाबा का लंगोट गुम गया है पता नहीं इतने जाड़े में बाबा वगैर लंगोट के कैसे घूमते होंगे ....

राज भाटिय़ा 4 जनवरी 2010 को 2:27 am  

लंगोटा नन्द बाबा की जय हो जी :) चुना लगा के

सतीश सक्सेना 18 अगस्त 2011 को 5:53 pm  

मैं कल्पना कर रहा हूँ जनरल, तुम्हे दुकान पर बैठकर चूना लगाते देखने की .....वाह क्या सीन है ?
वैसे ताऊ की हेराफेरी कम थी क्या जो लंगोटानन्द को और बुला लिया ...
अलख निरंजन !!