गुरुवार, 21 जनवरी 2010

इंग्रेजी भाषा, लपटन जी और हमारी दुविधा


ओईसे तो हम बहुते अंग्रेजी पढे , और फ़िर काहे नहीं पढें , ई सोच के पढ लेते हैं कि हम लोग तो खाली अंग्रेजी को झेल रहे हैं , अपने पूर्वज़ लोग तो बेचारे पूरे के पूरे अंग्रेजन राज को और अंग्रेज सब को झेले थे ,बस यही सोच के झेले जा रहे हैं और ठेले जा रहे हैं ।यही परमदुविधा की स्थिति में हम पान के गुमटी पर पहुंच गए । अईसन घोर घडी में हम बचपने से पान के गुमटी पर धरना देते रहे हैं , अरे पान बीडी गुट्खा के लिए नहीं जी बल्कि , वहां लपटन जी से सार्थक विमर्श करने के लिए । लपटन जी की पान की गुमटी पर उपलब्धता की गुंजाईश कम से कम इससे तो जरूर ही ज्यादा रहती थी जितनी कि शरद पवार को चीनी के दाम कम होने की है । सो हम चल दिए लपटन जी से विमर्शियाने ।

लपटन जी , ई अंग्रेजी को लेकर हमरे मन में बहुते दुविधा रहती है कुछ मार्गदर्शन करिए । अच्छा ये बताईए कि , नैसर्गिक उष्मावर्धक पेय पदार्थ (अरे ,दारू यार )के दुकान पर लिखा होता है , यहां अंग्रेजी भी मिलती है ........जबकि नीचे लिखा होता है देसी ठेका । बडा ही धर्म संकट है भाई , लपटन जी कुछ प्रकाश डालिए न ।

यार तुम लोग भी न एकदम अनाडी ही रहे । अब इसमें तुम्हारा कोई कसूर भी नहीं है लगाते तो हो नहीं तो दुविधा तो बनी ही रहेगी न । देखो उस देसी ठेके से जब कोई वो लेता है न ,,,अरे दारू यार ...तो कुछ पैग मारने के बाद किस भाषा में बात करने लगता है ......अंग्रेजी में । ....फ़िश फ़्लैट ,,दिस दैट, ढिंग टिलुम , ट्विंग टैंग ......और भी । अंग्रेजी भी ऐसी कि अंग्रेजों के बाप भी न समझ पाएं । समझे कि नहीं ,..इसलिए देसी ठेके पर मिलने वाली से अंग्रेजी ........मिल जाती है ।

अच्छा लपटन जी ये मान लिया , है तो मेरे घर की बात , मगर फ़िर भी आपसे पूछ लेता हूं । घर पे श्रीमती जी पढती हिंदी का अखबार भी नहीं , मगर जोर देती हैं कि अंग्रेजी वाला भी चालू कर लो, काहे ...हम समझ नहीं पाते हैं ।

हा हा हा लो ई कौन भारी बात है , अरे झा जी , दु रुपैय्या में एतना रद्दी इकट्ठा हो जाता है , ई फ़ैसिलिटी अंग्रेजी अखबार में ही तो होता है , समझे कि नाहीं ॥

अच्छा छोडिए ई सब और नयका खबर सुनिए ,विंडोस का नया एक दम फ़्रेश पंजाबी वर्जन आया है

उसका शब्दावली देखिए आप झाजी

सेंड (send ) ......... इन पंजाबी ..........सुट्टो

फ़ाईंड (find ) ............." ..........................लब्बो

डाऊनलोड (download ) ........................थल्ले लाओ ।

डिलीट (delete )....................................मिट्टी पाओ ।

Ctrl +Alt+Del ........................................स्यापा ही मुकाओ ॥

पूरा कोर्स करते ही बताएंगे, आना आप भी , सुने झाजी , अरे ई लोगों को भी कह दीजिए न , सुन रहे हैं न

11 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 21 जनवरी 2010 को 8:32 pm  

ई पंजाबी वर्जन हमे भी भिजवाईगा और लपटन जी से कहिएगा के 30रुपया मे एतना साहितिक ईंगरेजी आ जाता है कि बडे स्कालर का डिमाग घुम जाता है। फ़ालतु है ईंगरेजी पढाई लिखाई। बस एक पव्वा लगाई और...............
जोरदार नुख्शा है हकीम लुकमान का।

काजल कुमार Kajal Kumar 21 जनवरी 2010 को 8:45 pm  

Ctrl +Alt+Deleted
हा हा हा

डॉ टी एस दराल 21 जनवरी 2010 को 9:35 pm  

हा हा हा !मजेदार।
ये पंजाबी वर्जन तो बहुत पसंद आया भाई।

Udan Tashtari 21 जनवरी 2010 को 10:00 pm  

स्यापा ही मुकाओ ॥...हा हा हा!!! और सीखो जल्दी जल्दी और सुनाओ!!

राजीव तनेजा 22 जनवरी 2010 को 1:49 am  

हा...हा....हा... मजेदार

राज भाटिय़ा 22 जनवरी 2010 को 2:44 am  

झा जी यह पंजाबी वर्जन हमारे लिये भी ले कर रखे,फ़िर उस मै टिपण्णियां भी पंजाबी मै होगी. चलिये अब स्वाह पाऒ

जी.के. अवधिया 22 जनवरी 2010 को 8:44 am  

"फ़िश फ़्लैट ,,दिस दैट, ढिंग टिलुम , ट्विंग टैंग ......"

हा हा हा हा, जोरदार अंग्रेजी है!

ताऊ रामपुरिया 22 जनवरी 2010 को 2:30 pm  

झाजी ये तो बहुत ही गजब की इंग्रेजी रही.:) मजा आगया.

रामराम.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 22 जनवरी 2010 को 4:11 pm  

वाह...क्या खूब धोया है!

Tarkeshwar Giri 22 जनवरी 2010 को 6:49 pm  

अरे इ त झा जी कमाल कर दिया है, हमरे पड़ोस मैं विनोद झा रहते बिलकुल ऐसे ही बोलते है।

Tarkeshwar Giri 22 जनवरी 2010 को 6:51 pm  

अरे इ त झा जी कमाल कर दिया है, हमरे पड़ोस मैं विनोद झा रहते बिलकुल ऐसे ही बोलते है। जबकि वो (वो) नहीं लेते है, बस उनको लौकाई नहीं देता है। लेकिन कभी कभी अन्ग्रेजी वाले ठेके के पास खड़े हो जाते है।