शनिवार, 16 जनवरी 2010

कौनऊ टाइप के हो तुम यार....

एक सप्ताह से ठंडी हवाओ का लम्बा सिलसिला चल रहा है . अच्छे अच्छो की सीटी बजने लगती है . इस कड़कती ठण्ड में अच्छे अच्छो के नल्ले पसले ढीले पड़ जाते है . कांपते कांपते अपुन फिर पहुँच गए पान की दुकान पर .

पानवाला बोला - भैय्या आज ग्राहकी कम है अच्छा है कै तुम आ गए . कम से कम अच्छे भले के समाचार तो मिल जाएँ .

मैंने कहा - भीषण कुहरा पड़ रहा है .. कुहरे में आँखों में टिपत नहीं है सो अपने घर से वे कहाँ निकलने वाले है.. घर में पल्ली तनके सो रहे है ... हमने उन्हें समाचार जानने के लिए चिट्ठी पतरी लिखने को कै बार कहा और कहा की आप आमंत्रित हमारे ब्लॉग में चिट्ठी लिख देवे करो पर पता नहीं भाई लोग कौन टाइप के है ....कै चुपचाप कथरी ओड़ के बैठे है .

पानवाला - तो भैया है तो सही बात पर नाराज काय हो रहे हो लेव एक नागपुरी पान खाओ और सुनाओ कैसे गुजर रही है ....

मैंने कहा - भाई पान वाले तुम्ही बताओ जब जुड़े हो तो कछु अपने वचन का पालन करो पता नहीं कौनऊ टाइप के है यार लोग बाग़ .

पानवाले ने कहा - हाँ है तो सौ टके की बात सटीक है और ऐसो सब जगह हो भी रहो है भैय्या .. हाँ कछु अपनी भी तो रखनी चाहिए ... कै नहीं ....

और मैंने चिट्ठी की उम्मीद की आशा करते हुए पान की दूकान से बिदा ली .

चर्चा - महेंद्र मिश्र
जबलपुर वालो द्वारा

10 टिप्पणियाँ:

HARI SHARMA 16 जनवरी 2010 को 6:09 pm  

वाह महेन्दर भैया हमनसे तुमने कब कइ के चिट्ट्ठीबाजी के लिये जगह खाली हत्ते. हम सुसर ठाले बैठे सोचे करे हे के दुकान चोखी चल री है काहे फ़टे मे हम पाव घुसेडे. खैर और सब ठीक है बडे भैया.

ललित शर्मा 16 जनवरी 2010 को 6:20 pm  

मिसिर जी चिट्ठेबाजी बढिया रही।

Udan Tashtari 16 जनवरी 2010 को 6:59 pm  

अब जोन टाईप के भी है, कम से टिके तो हैं बड्डॆ..वरना तो इत्ती ठंड में कोई की भी लाई लुट जाये. :)

ताऊ रामपुरिया 16 जनवरी 2010 को 7:16 pm  

जे तो घणी चोखी कही बड्डे.

रामराम.

राज भाटिय़ा 16 जनवरी 2010 को 7:49 pm  

आज नाग पुरी तो बहुत चोखा लगा जी

मनोज कुमार 17 जनवरी 2010 को 1:11 am  

बढिया।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक 17 जनवरी 2010 को 7:16 am  

पान की दूकान भी बढ़िया ऐर चर्चा भी बढ़िया!

काजल कुमार Kajal Kumar 17 जनवरी 2010 को 11:11 am  

ठंड की अब औ‍र याद न दिलाओ

accuweather.com यहां दिल्ली में इस समय दिन के 11 बजे 9 डिग्री से0 व घना कोहरा दिखा रहा है.

खिड़की बाहर कुछ-कुछ ही दिख रहा है.

बड़ी देर बाद अब कहीं जाकर जहाज़ों के उड़ने की आवाज़ आने लगी है.

मुआ हीटर भी यूं नखरे दिखा रहा है मानो कह रहा हो "बस करो, अब थक गया"...

वाह मैं तो कवि हो गया :-))

श्याम कोरी 'उदय' 18 जनवरी 2010 को 9:01 am  

... रोचक अभिव्यक्ति !!!

Ajay Saxena 10 मार्च 2010 को 7:32 pm  

रोचक प्रस्तुति ..
http://www.cartoonistajay.blogspot.com