शनिवार, 23 जनवरी 2010

वे नेता जी की पिस्तौलें सौंपना चाहते हैं राष्ट्र को!

नेताजी के सचिव रहे ८९ वर्षीय त्रिलोक सिंग चावला थाईलैंड में रहते हैं. उन्होंने आज भी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की दो पिस्तौलें सहेज कर रखी हैं. वे इस अमानत को भारत सरकार को सौंपना चाहते हैं. 
उन्होंने इस संबंध में बात करने के लिए अपने बेटे को भारत भेजा था. संतोष सिंग ने विगत दो हफ़्तों से प्रधान मंत्री से मिलने की कोशिश की है ताकि इन दोनों पिस्तौलों को भारत सरकार को सौंप कर अपने पिता की अधूरी ख्वाहिशों को पूरा कर सके. 
त्रिलोक दोनों पिस्तौलों कोल्ट-३२ और ऍफ़ एन-६३५ अपने साथ रखते हैं. वह इन हथियारों की रोज पूजा भी करते हैं. उन्होंने अपने बेटे संतोष सिंग को मनमोहन सिंग जी से मुलाकात करने के लिए भेजा है उल्लेखनीय है की २३ जनवरी को नेताजी की ११३ वर्षगांठ है. 
त्रिलोक सिंग जी  का कहना है कि नेताजी चाहते थे कि ये दोनों पिस्तौलें लाल किले में लौटा दी जाए. इन हथियारों को सौपने के आठ दिन बाद ही एक विमान हादसे में उनके निधन की खबर आई. मैं नहीं मानता की नेताजी हमारे बीच नहीं हैं और मैं आज तक उनकी राह देख रहा हूँ. परन्तु उम्र बढ़ने के साथ ही चाहता हूँ कि उनकी अमानत राष्ट्र को सौंप देनी चाहिए. वो चाहते हैं कि भारत के लोग इन पिस्तौलों को देखने से वंचित ना रह जाएँ.  

10 टिप्पणियाँ:

खुशदीप सहगल 23 जनवरी 2010 को 8:09 am  

भारत सरकार को त्रिलोक सिंह जी का सम्मान करना चाहिए जो उन्होंने देश की अमानत और नेताजी की निशानियों को इस तरह संभाल कर रखा...

जय हिंद...

शरद कोकास 23 जनवरी 2010 को 8:24 am  

त्रिलोक सिंह जी भले ही थाइलैंड में हों लेकिन उनका मन भारत मे है यह इस बात का प्रमान है जबकि हमारे देश मे कई लोग ऐसे है जिनका तन तो यहाँ है और मन विदेश में । नेताजी ज़िन्दाबाद ।

ताऊ रामपुरिया 23 जनवरी 2010 को 8:27 am  

त्रिलोकसिंह जी की भावना देशभक्तिपुर्ण है. उनको सम्मानित किया जाना चाहिये . नेताजी को नमन.

रामराम.

राजीव तनेजा 23 जनवरी 2010 को 9:09 am  

त्रिलोक सिंह जी के जज्बे को सलाम

Vivek Rastogi 23 जनवरी 2010 को 9:11 am  

त्रिलोक सिंह जी को नमन, कि उन्होंने नेता जी की धरोहर संभाल कर रखी।

निर्मला कपिला 23 जनवरी 2010 को 10:27 am  

त्रिलोक जी की भावनाओं को सलाम

पी.सी.गोदियाल 23 जनवरी 2010 को 10:38 am  

यह इस देश का दुर्भाग्य रहा कि जो कुछ कर गुजरने की हिम्मत रखता था उसे देश और काल दोनों निगल गए वक्त से पहले , आज उनकी जयंती पर मेरी उनको शर्दान्जली !

राज भाटिय़ा 23 जनवरी 2010 को 2:47 pm  

क्या कांग्रेस यह सब चाहेगी?त्रिलोकसिंह जी की भावना को ओर उन्हे नमन है, आज अगर देश के नेता सच मै नेता सुभाषचंद्र जी को मानते तो उन के परिवार को भी भारत लाते, उन की बिटिया यहां जर्मन मै रहती है, लेकिन हमे तो एक परिवार की गुलामी से ही समय नही मिलता तो देश भगतो को कोन पुछे... इस सब से अच्छे तो त्रिलोकसिंह जी ही है, जो आज तक नेता जी को सम्मान देते आ रहे है

डॉ टी एस दराल 23 जनवरी 2010 को 4:39 pm  

त्रिलोक सिंह जी का सम्मान तो करना ही चाहिए। उनकी ख्वाइश भी पूरी होनी चाहिए।
नेता जी को दिल से सलाम।

मनोज कुमार 23 जनवरी 2010 को 5:26 pm  

नेताजी ज़िन्दाबाद ।