मंगलवार, 23 मार्च 2010

तमीज से बात कर बे.....कस्टमर से ऐसे बात करते

टयूसन वाले सर बोले ----- अबे गधे होम वर्क क्यों नहीं करता तू?????
तो बच्चा बोला ------ तमीज से बात कर बे.....कस्टमर से ऐसे बात करते हैं 
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टीचर ने पुछा ---- बताओ जो लोग गंदे काम करते हैं वो कहाँ जातें हैं???
छात्र --- जी बुद्धा गार्डेन, लोधी गार्डेन, पुराना किला, जापानी पार्क.........
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मुर्गा बोला --- आइ लव यू मेरी जान......तेरे लिए कुछ भी करूँगा.....
मुर्गी बोली ---- हाय मैं मर जावा.....सच क्या ???
मुर्गा बोला --- हाँ मेरी जान 
मुर्गी बोली --- तो चल फिर अंडा दे आज से..............
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मैडम ने बोला ---- टुन्नू दस तक गिनो तो एक पप्पी दूंगी.....
टुन्नू ------ अगर १०० तक गिनू तो क्या मिलेगा???????
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संता अंडरवेअर लेने दुकान पर जाता हैं और एक अंडरवेअर चुन लेता हैं 
दुकानदार --- यह पांच सौ का हैं 
संता --- अबे  डेलीवेअर चाहिए पार्टी वेअर नहीं...........
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संता नहा रहा था!!!!!!!!!!
बंता ने आवाज लगाई..........संता ऐसे ही बाहर आ गया 
बंता बोला --- कुछ तो पहन लेता यार!!!!
संता अन्दर गया और हवाई चप्पल पहन कर आ गया

15 टिप्पणियाँ:

कृष्ण मुरारी प्रसाद 23 मार्च 2010 को 10:39 pm  

मजा आ गया सर जी.....
अब ये पहेलियाँ भी सुलझाइये......
..................
विलुप्त होती... नानी-दादी की बुझौअल, बुझौलिया, पहेलियाँ....बूझो तो जाने....
.........
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_23.html
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....

ललित शर्मा 23 मार्च 2010 को 10:41 pm  

हा हा हा
मजेदार चुटकुले फ़ड्कते हुए

आनंद आ गया
बधाई

pukhraaj 23 मार्च 2010 को 10:44 pm  

बोला --- आइ लव यू मेरी जान......तेरे लिए कुछ भी करूँगा.....मुर्गी बोली ---- हाय मैं मर जावा.....सच क्या ???मुर्गा बोला --- हाँ मेरी जान मुर्गी बोली --- तो चल फिर अंडा दे आज
ha ha ha ..... what an idea ..sir ji .....

महेन्द्र मिश्र 23 मार्च 2010 को 10:57 pm  

हा हा कस्टमर से ऐसे बात करते हैं ... मजेदार चुटकुले

राजीव तनेजा 23 मार्च 2010 को 11:57 pm  

मजेदार

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" 24 मार्च 2010 को 12:55 am  

very good!!!

डॉ टी एस दराल 24 मार्च 2010 को 8:32 am  

हा हा हा ! मज़ेदार चुटकले भाई। आनंद आ गया ।

काजल कुमार Kajal Kumar 24 मार्च 2010 को 1:43 pm  

इन चुटकुले लिखने वालों को ख़ुशवंत सिंह के अलावा आजतक किसी ने आदर नहीं दिया. और मैं ख़ुशवंत सिंह को इसीलिए इज़्ज़त की नज़र से देखता हूं न कि उनकी नानक नाम जहाज़ है या कि अ ट्रेन टू पाकिस्तान की वजह से.

मैं कई बार सोचता हूं कि आखि़र ये चुटकुले लिखता कौन होगा. फिर इसी बात से तसल्ली कर लेता हूं कि लोक-विरसे के लेखकों को भी कौन जानता है (और शायद ये रचनाएं इतनी सशक्त भी इसीलिए होती हैं कि इनकी रचना के पीछे कोई भी स्वार्थ नहीं रहता )...वर्ना आज तो फुसफसी चीज़े लिखकर भी पता नहीं कौन-कौन से 'श्री' पुरूस्कार जुगाड़े रहते हैं 'बड़े-बड़े' लोग.

लेखकों को साधुवाद व हंसने का अवसर प्रदान करने के लिए आपका धन्यवाद.

माणिक 24 मार्च 2010 को 1:44 pm  

आपके ब्लॉग पर आकर कुछ तसल्ली हुई.ठीक लिखते हो. सफ़र जारी रखें.पूरी तबीयत के साथ लिखते रहें.टिप्पणियों का इन्तजार नहीं करें.वे आयेगी तो अच्छा है.नहीं भी आये तो क्या.हमारा लिखा कभी तो रंग लाएगा. वैसे भी साहित्य अपने मन की खुशी के लिए भी होता रहा है.
चलता हु.फिर आउंगा.और ब्लोगों का भी सफ़र करके अपनी राय देते रहेंगे तो लोग आपको भी पढ़ते रहेंगे.

सादर,

माणिक
आकाशवाणी ,स्पिक मैके और अध्यापन से सीधा जुड़ाव साथ ही कई गैर सरकारी मंचों से अनौपचारिक जुड़ाव
http://apnimaati.blogspot.com



अपने ब्लॉग / वेबसाइट का मुफ्त में पंजीकरण हेतु यहाँ सफ़र करिएगा.
www.apnimaati.feedcluster.com

sidheshwer 24 मार्च 2010 को 2:14 pm  

बढ़िया जी

Dr. Smt. ajit gupta 24 मार्च 2010 को 5:38 pm  

बढिया है जी।

M VERMA 24 मार्च 2010 को 5:38 pm  

100 तक की गिनती तो बहुतों को आती है

अजय कुमार झा 24 मार्च 2010 को 8:34 pm  

हा हा हा बहुत खूब सब धर धर के रखे हैं आप ..मजा आ गया
अजय कुमार झा

Dr Satyajit Sahu 25 मार्च 2010 को 2:02 pm  

mazedaar

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" 25 मार्च 2010 को 5:32 pm  

हा हा हा..:-)