हमारे देश मे पान की दुकानें नुक्कड़, चौराहे, गली, मोहल्ले के हर कोने पर होती हैं, यह एक ऐसा खुला मंच है जहाँ देश-विदेश की राजनीति, कला, फ़िल्म, गीत, कविता, गजल, ज्ञान- विज्ञान, जमीन से लेकर अंतरिक्ष तक की घटनाओं की बेबाक चर्चा होती है, कभी-कभी जूतम पैजार की नौबत भी आ जाती है, ये एक स्थान है जहाँ एक आम आदमी भी अपनी बात कह जाता है बड़े रोचक अन्दाज मे, कलमकारों को यहीं पर मौलिक चिंतन नि:शुल्क प्राप्त होते हैं लेखन के लिए, इस मायने मे यह एक महत्वपुर्ण स्थान है और माना जाता है कि राजनीति की प्रथम पाठशाला से लेकर सामाजिक सरोकारों से सम्बधित विभिन्न विषयों पर अंतिम शोध कार्य भी तो यहीं पर ही होता है। इसमे प्रकाशित विचार एवं आलेख लेखक के अपने हैं उसमे व्यवस्थापक की सहमति अनिवार्य नही है, लेखक स्वयं उत्तरदायी है।
21 टिप्पणियाँ:
हाहाहा, यह बढ़िया रही।
घुघूती बासूती
कुछ नहीं कहना. अब बस.
हा हा हा
चित्रों ने ही सब कह दिया।
जोर दार पोस्ट
धांसु आईडिया।
badhiya hai...no more blogging....
वाह !!
nice
वाह मोरनी कितना सुंदर नाच रही थी..... लेकिन यह मोर .....यस नो मोर जी
नो मोर मत कहिये भाई, बल्कि कहिये अब मोर ही मोर.
रामराम.
बेहतरीन!!
बहुत ही बढ़िया......व बहुत ही रोचक
मोर लडने में मशगूल हैं और बेचारी मोरनी खडी देख रही है :-)
ये तो बता देते भाई, मोर धर्म को लेकर भिड़े या नारी विमर्श पर...
जय हिंद...
haa haa.. mast
भैया शीर्षक देखकर तो हम डर ही गए थे कि एक और पलायन? लेकिन यहाँ तो खेल ही दूसरा है। मोर भी ब्लागिंग कर रहे हैं। फिर तो लोग कहेंगे कि दिल मांगे मोर।
संदेशमय सुंदर चित्र
kya baat hai mitr
saadar
praveen pathik
9971969084
शब्दों से ज्यादा चित्रों ने असर किया....बढ़िया पोस्ट
mazedar raha.. :)
नो,
मोर ब्लॉगिंग
हा हा यह बढ़िया था, सब कुछ चित्रों से ही कह दिया।
bahut baDhiyaa bhaai
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