शनिवार, 20 मार्च 2010

बनारसी पान के किस्से फ़कीरा सुनाते पान की दुकान पर



भैया बनारसी पान तो वर्ल्ड फेमस हैं और उससे भी ज्यादा फेमस हैं बनारसी पान से जुड़े हुए किस्से और लतीफे। न जाने कितने ही संगीतज्ञों , लेखको, शायरों और राजनीतिज्ञों की कमजोरी रहा हैं यह बनारसी पान। तो जनाब बंदा हाज़िर हैं बनरसी पान की पीक से जुड़े दो किस्सों के साथ। एक तो महाराज देखा हैं दूसरा सुना हैं। जो देखा हैं उसको तो बाद दिखाया जायेगा पहले शो में सुना हुआ किस्सा सुनाया जाएगा।
तो महाराज सब जानते हैं कि विदेशो में शास्त्रीय संगीत की कितनी धूम हैं। विदेशी लोग बहुत पसंद करते हैं और हिन्दुस्तानी उनकी इस अदा को बहुत पसंद करते हैं। सितार तो सबने ही सुना होगा। हुआ यूं कि एक नामी सितार वादक फ्रांस गए। उस्ताद जी बनारसी पान का बहुत शौक था। जहाँ जाते थे पान भी उनके साथ जाता था। अब जहाँ शो हुआ वहीँ पर लोकल अख़बार के एक पत्रकार महोदय उपस्थित थे। उन्होंने क्या देखा कि उस्ताद जी सितार पर सुर लगाते और जब राग पूरे शबाब पर होता, तो मुहं से जबरदस्त "खून" की उलटी कर देते। पत्रकार ने "तानसेन" वाला किस्सा सुन रखा था। ब्रेअकिंग न्यूज़ कैसे मिस करता वो। अगले दिन अख़बार में अख़बार में चाप दिया।
"फलाने ढिमाके सितार वादक ने संगीत में प्राप्त करी महानता, राग "खुनी" का रोमांचक प्रदर्शन"। जब उस्ताद जी तक यह बात पहुची तो उन्होंने माथा पीट लिया।

अब आपको अगला एपिसोड दिखाते हैं। हमारे चाचा की शादी थी। बारात बस में जा रही थी। एक ढाबे पर रुकना हुआ। फिर खाना पीना और उसके बाद बनारसी पान। तो भइये , खा पी कर सब बस में सवार हो गए। यहाँ पर भी एक उस्ताद जी थे। अजी बस के ड्राईवर। प्यार से लोग बस ड्राईवर को भी बोलते हैं....."उस्ताद जी, जरा ब्रेक लगा देना"। अब इन उस्ताद जी ने मुहं में दो बनारसी पान डाल लिए और बस को फुल स्पीड में चलने लगे। पीक को सड़क पर, कोने में फेकने की "महान हिन्दुस्तानी आदत" का पालन करते हुए उस्ताद जी ने खिड़की से मुहं बाहर निकल कर १८० डिग्री का कोण बनाते हुए, पीक निवारण कर दिया। एक बाराती महाशय, भोजन के उपरांत रास्ते की ठंडी हवा का आनंद लेते हुए, खिड़की से मुहं बाहर निकल कर शयन कर रहे थे। उनका खुला मूह देख कर "पीक" को लगा निमत्रण हैं, सो पहुच गयी सीधे उनके मुख के अन्दर। हर तरफ से लाल वो महाशय तभी जाग गए और "श्लोक उच्चारण" शुरू कर दिया। बात "लत्तम-जुत्तम" तक पहुच गयीं। शादी का अवसर था, इसलिए वो "एक बोतल" में मान गए।

8 टिप्पणियाँ:

कृष्ण मुरारी प्रसाद 20 मार्च 2010 को 3:30 pm  

majaa...aa....gayaa....
......
.....लड्डू बोलता है.....
विश्व गौरैया दिवस-- गौरैया...तुम मत आना....
http://laddoospeaks.blogspot.com

Suman 20 मार्च 2010 को 5:04 pm  

.nice

काजल कुमार Kajal Kumar 20 मार्च 2010 को 5:26 pm  

पान ही महान

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" 20 मार्च 2010 को 5:32 pm  

nice

ललित शर्मा 20 मार्च 2010 को 6:08 pm  

हा हा हा
पान का पान किजिए
रसास्वादन मुफ़्त किजिए

महेन्द्र मिश्र 20 मार्च 2010 को 8:38 pm  

लाजबाब है पान की मुस्कान .....

डॉ टी एस दराल 20 मार्च 2010 को 9:12 pm  

रोचक संस्मरण ।

ताऊ रामपुरिया 20 मार्च 2010 को 11:41 pm  

बहुत रोचक.

रामराम.