शुक्रवार, 23 अक्तूबर 2009

"चर्चा पान की दूकान पर" हमारा नया ब्लॉग

एक निवेदन भूमिका स्वरूप 

मित्रों "चर्चा पान की दूकान पर" हमारा नया ब्लॉग है. इसके नामकरण के सम्बन्ध में साथियों से बहुत चर्चाएँ हुई, कईयों ने अलग-अलग नाम सुझाये, आखिर इस नाम पर सहमती बन ही गई, क्योंकि हमारे देश में पान की दुकाने एक आम आदमी से सीधा-सीधा संपर्क, सम्बन्ध एवं सरोकार रखती है, गांव के गली कुचों से लेकर शहर के नुक्कड़ तक, बीच चौराहों से लेकर शहरों में कोने-कोने तक मिल जाती हैं.अगर हमें अनजान शहर में भी किसी का पता पूछना हो तो यहाँ पर आसानी से मिल जाता है.पान की दुकान पर खड़े-खड़े ही मित्रों में- अनजान व्यक्तियों में अनायास ही विभिन्न मुद्दों पर चर्चाएँ छिड़ जाती है.चाहे वो अंतर्राष्ट्रीय, रास्ट्रीय एवं स्थानीय हो, कभी-कभी गंभीर चर्चाओं के साथ-साथ हास्य भी यहाँ पर निकल आता है, मुद्दे भी वो होते हैं जो एक आम आदमी से सीधे-सीधे जुड़ जाते हैं, एक मित्र ने कहा कि क्या ये नाम आधी दुनिया (महिलाओं) का प्रतिनिधित्व करेगा? आज कई जगहों पर मैंने देखा है कि महिलाएं ही पान की दुकाने चलाती हैं. अब इस युग में ये बातें मायने नहीं रखती. इस ब्लॉग में हमारे लेखक साथी भी लिख सकते हैं. हम एक स्वच्छ- विवाद रहित,आम आदमी के सरोकारों से जुड़े हुए विचार इस पर रखेंगे. अभी इस ब्लॉग पर हमारे साथी लेखक अनिल पुसदकर, प्रसिद्द व्यंगकार गिरीश पंकज, साहित्यकार शरद कोकास, संजीव तिवारी, बी.एस.पावला, राजीव तनेजा राजकुमार ग्वालानी, एवं अन्य रचना कारों का गंभीर साहित्य लेखन पढने मिलेगा.ये हमारा एक सामूहिक प्रयास है, जो आपको पसंद आएगा. इसी आशा के साथ हिंदी ब्लॉग जगत को समर्पित है,"चर्चा पान की दुकान पर".

ललित शर्मा 

7 टिप्पणियाँ:

ललित शर्मा 23 अक्तूबर 2009 को 9:57 pm  

कंमेंट बाक्स शुरु हो गया है समीर भाई

राजीव तनेजा 23 अक्तूबर 2009 को 11:43 pm  

स्वागतम....

अगर हलका-फुलका लिखवाना हो तो मैँ भी आपकी जमात में शामिल होना चाहूँगा

जी.के. अवधिया 24 अक्तूबर 2009 को 9:01 am  

नये ब्लॉग की बहुत बहुत बधाई!

आपका यह नया ब्लॉग दिन दूनी और रात चौगुनी तरक्की करे!!

कल ही टिप्पणी देना चाहा था पर ताला लगा हुआ था। आज देखा कि ताला खुल गया है तो टिप्पणी दे दिया।

akhilesh akhil 24 अक्तूबर 2009 को 1:08 pm  

blog dekha padha . behtar hai. badhai. akhilesh akhil

शिवम् मिश्रा 25 अक्तूबर 2009 को 12:24 am  

आप सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं !

बालकृष्ण अय्य्रर 25 अक्तूबर 2009 को 8:21 pm  

इस ब्लाग को पढ्कर कुछ नये प्रयोगों का विचार आया,
बधाई के पात्र हैं शुभकामनाओ सहित - अय्यर्

Bhagyoday 27 अक्तूबर 2009 को 4:29 pm  

Lalit bhai aapne hamare blog ki ore apna dhyan diya iske liye dhanyvad. aasha hai ki aap ise anya logon tak bhi pahunchyenge aur bhagyoday organic company ke vistar me sahyog karenge.