रविवार, 10 जनवरी 2016

बाप अपने बेटे की बलि दे रहा है!शर्मनाक है?साक्षरता,विकास और रोज़गार के दा...

3 टिप्पणियाँ:

ब्लॉग बुलेटिन 10 जनवरी 2016 को 7:55 pm  

ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन, सरकारी बैंक की भर्ती - ब्लॉग बुलेटिन , मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

Satish Saxena 30 जुलाई 2020 को 12:04 pm  

आह , बेहद तकलीफदेह विषय लिया है अनिल भाई आपने ...
बीभत्स और कलंकित अध्याय है हमारे समाज का !
थू है इस पर !!

इन जाहिलों के मध्य, कौन सुनेगा अनिल की आवाज ?

सच कहूँ तो देश मेरा , जाहिलों का देश है !
मूढ़,मूरख औ निरक्षर,काहिलों का देश है !

ढोर झुंडों की तरह आपस में लड़ते ही रहे
जाति धर्मों में बंटे, लड़ते जिलों का देश है !

PurpleMirchi 12 फ़रवरी 2022 को 10:30 pm  

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